वाह रे गरीबी जिस उम्र में हाथों में किताबें होनी थी उस उम्र में कटोरा थमा दिया ।

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रिपोर्टर संजीव सक्सेना।

फर्रूखाबाद/ट्रेन में भीक मांगकर करती अपने परिवार का भरण पोषण।गरीबी की तंगी और परिवार का भरण पोषण भीख मांगने पर मजबूर कर देता है। कुछ अयसा ही देखने को मिला जनपद फर्रूखाबाद की रेलवे स्टेशन पर एक नाबालिग ट्रेन में भीख मांग रही है युवती से ईस्ट इंडिया टाइम्स रिपोर्टर ने उसके भीख पर पूंछा उसने कहा एक दिन में 300 सौ से 500 सौ रुपए कमाती है उसके माता पिता के बारे में बात की उसने अपने परिवार का नाम बताने से इंकार कर दिया उस नाबालिग ने केवल अपना ही नाम बताया खुशी की उम्र लगभग 8 से 10 वर्ष की होगी बालिका ने कहा वो भीख अपनी मां के खाने के लिए मांगती है पिता मजदूरी करते हैं ,खुशी ने कहा वो फर्रूखाबाद से फतेहगढ़ तक भीख मांगती है ,जब के जनपद के फतेहगढ़ में ज़िला मुख्यालय से जकड़ा हुआ है, इन दोनों स्टेशनों पर जनपद के अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों का आवागमन लगा रहता है,इस बालिका पर आज तक किसी की भी निगाह नहीं पड़ी,आखिर कब मासूम बचे के हाथों में किताब होगी,दर ब दर भटकने को मजबूर,

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