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वक़्फ़ संशोधन विधेयक 2025 को लेकर शहर क़ाज़ी सैय्यद शाहनियाज़ अली ने की अपनी राय जाहिर

ईस्ट इंडिया टाइम्स रिपोर्ट सौरभ अग्रवाल।

फिरोजाबाद । वक़्फ़ संशोधन विधेयक 2025 पर तल्ख टिप्पणी करते हुए शहर क़ाज़ी सैय्यद शाहनियाज़ अली ने अपनी राय जाहिर करते हुए कहा कि, वक़्फ़ संशोधन विधेयक 2025 जो लोकसभा में पारित होकर राज्यसभा में भेजा गया है। जिसके चलते हिंदुस्तान की सियासत में भूचाल सा आया हुआ है। लेकिन ये बात तो बिल्कुल साफ है कि, निजी संपत्तियों को वक़्फ़ क्यों किया जाता है और इसका इस्तेमाल कहां होता है ?

फिर भी वक़्फ़ कानून में किसी भी तरह की तरमीम (संशोधन) समझ से परे है। वहीं अगर वक़्फ़ संपत्तियों पर एक नज़र डाली जाए तो 99 फीसद देखने को मिलेगा कि, वो संपत्तियां जो कौम ओ मिल्लत की भलाई और तरक़्की के लिए वक़्फ़ की गई थीं उस पर भू माफियाओं, गुंडों ओर हिस्ट्रीशीटरों के साथ साथ सफेद पेशों का भी कब्ज़ा है जो कौम ओ मिल्लत के तथाकथित ठेकेदार बने बैठे हैं। ऐसे ही लोग वक़्फ़ बोर्ड की सांठ गांठ से खुद में उन जायदादो के मुतावल्ली, खजांची और सदर बने हुए हैं और इन तथाकथित ठेकेदारों से कौम ओ मिल्लत का किसी भी तरह का भला नहीं होता और न होगा।

उन्होंने कहा कि, आवाम ठंडे दिमाग से सोचे कि, ऐसी कितनी जायदादें हैं और को आसरा दिया जा रहा है ? कितने तालीमी इदारे (शैक्षिक संस्थान) खोले गए ? कितने शिफा खाने (क्लिनिक) खोले गए ?

रिजल्ट ज़ीरो ही आयेगा। सच बात तो यही है कि, वक़्फ़ जायदादो से भू माफियाओं, गुंडों ओर हिस्ट्रीशीटरों का ही भला हो रहा है और उन लोगों व उनके परिवार का भी भला हो रहा है जो लोग वक़्फ़ बोर्ड की सांठ गांठ से खुद में उन जायदादो के मुतावल्ली, खजांची और सदर बने हुए हैं और उन वक़्फ़ जायदादो को अपने ही रिश्तेदारों को किराएदारी पर नाम मात्र राशि पर दे दिया जाता है साथ ही वक़्फ़ जायदादो पर लोन का पैसा लेकर मौज की जाती है।

ऐसा बिल्कुल नहीं है कि सभी लोग एक जैसे है, कुछ वक़्फ़ जायदादों के मुतावल्ली, खजांची, सदर और इंतजामीया अच्छे ओर ईमानदार भी हैं, परंतु ऐसे लोग नाम मात्र ही हैं। फिर हु-हल्ला किस बात का, आवाम को तो पहले भी वक़्फ़ जायदादो से कोई फ़ायदा नहीं मिल रहा था। तो, अब अगर सरकार वक़्फ़ संशोधन विधेयक 2025 के जरिए वक़्फ़ जायदादो पर अपना नियंत्रण बनाने का प्रयास करती है तो भी आवाम को कोई नुकसान नहीं। क्योंकि, क़ौम वही दो – राहे पर खड़ी है जहां, हमारे तथाकथित रहनुमाओं और ठेकेदारों ने हमारी आवाम को खड़ा किया है, हां यदि सरकार वक़्फ़ कानूनों पर संशोधन करने के बजाय पहले ऐसे लोगों के खिलाफ कानून बनाती जो वक़्फ़ जायदादो पर कब्ज़ा किए हुए हैं तो और भी ज्यादा अच्छा होता।

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